सब्र: मोमिन की सबसे बड़ी ताक़त
सब्र का अर्थ केवल चुप रहना नहीं है, बल्कि अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहना है। क़ुरआन में सब्र करने वालों के लिए बेहिसाब अज्र का वादा किया गया है।
सब्र का अर्थ केवल चुप रहना नहीं है, बल्कि अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहना है। क़ुरआन में सब्र करने वालों के लिए बेहिसाब अज्र का वादा किया गया है।
ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।
हज़रत मख़दूम अशरफ़ सिमनानी ने सल्तनत छोड़कर फ़क़्र अपनाया और हिंदुस्तान में दीन की शमा रोशन की।