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ज़कात: समाज की आर्थिक बुनियाद

ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।

ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।

ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।

ज़कात: समाज की आर्थिक बुनियाद

إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ

ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।

ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।

ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। यह धन को पाक करती है और समाज में ग़रीबों का हक़ अदा करती है।

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